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जवानों की शहादत के पीछे नेताओं का हाथ !

शहीद होते हमारे देश के जवान नेता सेंकते हैं अपनी रोटियां गृहमंत्री कर देते हैं निंदा प्रधानसेवक कर देते हैं ट्वीट टीवी एंकर स्टूडियों में करते हैं लड़ाई हमारे देश के वीर जवान आए दिन आतंकवादियों का निशाना बनते हैं...और उन्हें हम शहीद का दर्जा दे देते हैं... जब कोई भी वीर जवान शहीद होता है तो हम मीडिया वाले टी.वी चैनलों पर अखबारों में सुर्खियां बना देते हैं.. दो से तीन दिन तक ख़बरें भी चलती है.. स्टूडियों में एंकर लड़ाई तक करता है....पर लगता ऐसा है कि हमारा सिस्टम ऐसा ही बना दिया गया हैhttps://www.googleadservices.com/pagead/aclk?sa=L&ai=CcFlUSJWdWvnkNYqOuwTQyqmIAYuWi7hQrZbfq9UGw6z75sMKEAEgy4nWI2DlgoCApA6gAabyqMEDyAECqQJmNTzSYoxQPqgDAcgDyQSqBNcBT9DH98O18EDKGqOAAlEXTGQ5CBM2BVuWWuqJcv1U6Tfv88fx0WWzzRHgJAcPgHFeDpUtq_3V7-Uj8E1P8hm7E35k8oaKHlYESCsvdo-cTYftMzPwxoWz8IQoLH9oen4DlBOyUWBLYDUWS2JD-Ru-86sbk-wjJ-5jbQnDZS-khRPm8QFaaJKPRZjG2wL7_EpYNYXcFNcefdTo9JUGYC5iAZNmw6P0ts4023BuoRiTNe8fmTkKzDSN4FgWaxzReW6ic57qqHCPrcA1fXRBgOccvBLLA3Ww66ugBgKAB6S_8z-oB6a-G9gHAdIIBwiAQBABGADyCA1iaWRkZXItMTY...

हम आज भी गुलाम हैं ?

15 अगस्त 1947 को हमारा देश यानि कि भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ... और 26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ... कि भारत अब संविधान से चलेगा..चलता आया है...पर आज गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी ने ये बताने की हिम्मत नहीं जुटाई कि गणतंत्र दिवस मनाया क्यों जाता है... पर गांव के स्कूलों में जरूर बताया गया होगा कि आखिरकार संविधान किसने बनाया क्यों बनाया कितना समय लगा..... डॉ भीवराव अंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया..इसीलिए बी . आर . अंबेडकर को संविधान निर्माता कहा जाता है... हमारे देश का संविधान 2 साल 11 माह 18 दिन में बनकर तैयार हुआ है.. .. हमारे देश के संविधान का मेन उद्देश्य है ‘ सत्यमेव जयते ’ ... कहते हैं कि सत्य परेशान होता है पर पराजित नहीं ... पर जिस हिसाब से आज दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर 10 देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद थे..इससे ये साबित होता है कि हमारा देश भारत काफी तरक्की कर रहा है... पर कितना कर रहा है ये पता नहीं...कितना सबक पाकिस्तान को जाता है इसका कोई भी अंदाजा नहीं है.... आए दिन ये पता चलता है कि हमारे इतने जवान देश की सरहद पर शहीद हो गए... ताकतें ...

रोहित सरदाना एक पत्रकार हैं..या कुछ और ?

आजकल सोशल मीडिया में रोहित सरादाना जी का नाम बहुचर्चित है..रोहित सरदाना  एक न्यूज एंकर और पत्रकार है...जी न्यूज को छोड़कर आज तक में शामिल हुए कुछ ही दिन हुआ...कि रोहित सरदाना को देशभक्ति और देशद्रोही वाले मुद्दे को लेकर काफी धमकियां मिल रही है...काफी लोग रोहित सरदाना के समर्थन में आ रहे हैं आना लाजमी भी है...मैं यू-ट्यूब पर एक वीडियो देख रहा था..उसमें एक शख्स है जो कि काफी लंबी-चौड़ी बाते कर रहा है..उसकी बातें सच है या नहीं..इसके बारे में मुझे तो नहीं पता...पर वो ये कह रहा है कि मैं रोहित सरदाना के घर का चौकीदार भी बन जाऊंगा..अगर जरूरत पड़ी तो... ठीक है कोई चौकीदार बने या कुछ बने उससे हमें लेना- देना कुछ नहीं है..पर इतना जरूर है कि सोशल मीडिया पर ही लोग अलग-अलग किस्म की बाते कर रहे हैं.. इंडिया टी.वी के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम फेसबुक पर रोहित सरदाना के ऊपर खूब तंज कस रहे हैं.. उन्होने फेसबुक पर लिखा कि देश में आग लगी है और चैनल पर सन्नाटा है.क्यो? मैं रोहित के साथ हूं लेकिन चैनल क्यों नहीं? होना चाहिए न? पत्रकार अंजीत अंजुम के इस स्टेटमेंट से साफ होता है कि रोहित...

...जो इस जहां से चले गए उन्हें मिल रहा है आशियाना...

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में ऐसा घोटाला सामने आया जिससे लोगों के होश उड़ गए , मर चुके लोगों को प्रधान और सेक्रेटरी ने मिल कर आवास आवंटित किये उनके फर्जी खातों में मनरेगा का रुपया ट्रांसफर होता रहा इस तरह  पूरे प्रकरण में लाखों रुपयों का सरकारी धन लूट लिया गया , जिसको लेकर गांव के लोग जो पात्र है दर दर भटकने को मजबूर है---  गाँव के किसी को  भी शौचालय नहीं मिला है गाँव के हालात काफी गंभीर है -  गरीब महिलाएं आज भी शौच के लिए खेतों में जाने को मजबूर हैं. ग्राम पंचायत अरवा गजाधरपुर  में प्रधान और सेक्रेटरी ने मिल कर सरकारी धन का ऐसा बंदर बाँट किया कि इंसानियत भी शर्मसार हो गयी --  इलाके के रहने वाले मृतक लोगों का फर्जी खाता खोल कर उनको पहले तो इंदिरा आवास आवंटित किये गए , --- आवास के लिए आने वाला 70  हज़ार रुपया प्रति खाता ट्रांसफर हुआ इसके अलावा इन्ही खातों में गरीब मज़दूरों के लिए आने वाला रुपया मनरेगा का रुपया भी इन्हीं खातों में ट्रांसफर हुआ है.. जिस तरह तकरीबन लाखों  का खेल अफ़सर और नेताओं ने मिल कर डाला..-पात्र लोगों के खातों में से भ...

साक्षी महराज ने दत्तकगांव की तकदीर बदल दी ?

प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश के अनुसार जिले के सांसद को प्रत्येक वर्ष एक गांव को गोद लेकर उसका विकास करना था... इसी क्रम में अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले उन्नाव के सांसद साक्षी महराज ने 2014 यानी कि आज से करीब साढ़े तीन साल पहले उन्नाव मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूरी पर टीकर गढ़ी नामक गांव को गोद लिया.... और बड़े बड़े वादे किए ...और बड़े बड़े सपने दिखाए गए.....गांव को गोद लिए हुए तीन साल बीत गए.. विकास का नामोनिशान मिट गया...औऱ गाँव अपनी बदहाली पर आज आंसू टपका रहा है.. ग्रामीणों का कहना है कि गांव को गोद लेकर सांसद जी ने विकास की गति रोक दी है....  ..उन्नाव जनपद का टीकर गढ़ी आदर्शगांव , आदर्शगांव सुनते ही आप के मन में एक शहर जैसे गाँव की परिकल्पना जरूर आ रही होगी.. लेकिन ऐसा कुछ भी नही है... दत्तकगाँव आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है... गांव की जनता को जो मूलभूत सुविधाएं बिजली पानी, सड़क, शौचालय मिलना चाहिए था... उन सुविधाओं से भी ये गांव पूरी तरह वंचित है... वजह सिर्फ एक बताया जाता है.... सांसद साक्षी महराज की अनदेखी का... साक्षी महराज को तो अपने विवादित ...

..आखिरकार बीजेपी क्या है ??

आप पढ़ रहे हैं -  http://www.tanashahi.blogspot.com/ जहां तक मैं जानता हूं..बीजेपी एक भारतीय राजनीतिक दल है...छोटे से छोटा चुनाव लड़ती है.और बड़े से भी बड़ा चुनाव लड़ती है. आज हमारे देश के पीएम नरेन्द्र मोदी बीजेपी यानि भारतीय  जनता पार्टी से है..गुजरात और हिमाचल में चुनाव होने वाले हैं.. इस चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक पार्टियां खुद को जीतता हुआ साबित कर रही है.कोई कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दे रहा है तो कह रहा है कि हम देश से बीजेपी को खदेड़ देंगे . पर मुझे समझ में ये नही आता कि अभी हाल ही में यूपी में विधानसभा चुनाव हुए थे..जिसमें बीजेपी अकेले ही सभी पार्टियों पर हावी थी.भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए सभी राजनीतिक दल एक हों गए..कि बीजेपी को किसी भी कीमत पर जीतने न दिया जाए..   पर ऐसा हुआ नही . मोदी मैजिक के आगे कोई भी टिक नहीं  पाया जो भी आया. उसका सफाया हो गया..राहुल गांधी और अखिलेश यादव दोनो एक हो जाते हैं तब भी बीजेपी को असफल करने में असफल रहते हैं..403 में से 325 सीटें बीजेपी के पाले में आई.325 में से कुछ सहयोगी दल भी थे.. क्यों पड़े हो चक...

भीख मांगना पेशा है या मजबूरी......

....समझ से बाहर है..कभी कभी इसे लोग मजबूरी में करते हैं और कितने लोंगो ने इसे पेशा बना रखा है बस अब कुछ नही करना है बस भीख ही मांगना है.. जो भिखारी मेरे सामने आता है मैं तो उसे कभी वापस नही करता चाहे वो जवान ही क्यूं न हो.. मुझे कबीर दास का दोहा याद आ जाता है.. मांगन मरन समान है मत कोई मांगो भीख....... मैं सोचता हूं कि वो आदमी तो अब मर चुका है .या खुद को मार लिया है तभी वो भीख मांग रहा है..जो आया मैंने तो उसे दे दिया ..पर एक हमारे दोस्त है.. उनके सामने एक भिखारिन आती है उन्होने पैसे नही दिये उस भिखारिन  से बोलते हैं कि चलो मेरे ऑफिस में झाड़ू-पोछा करो. तुम्हें 1500/ महीने देंगे तो उस भिखारिन ने काम करने से  साफ मना कर दिया कहा कि मैं तो हर रोज 1500 से 2000 कमा लेती हूं , मैं काम क्यों करुं... पर हाँ इतना जरुर है कि कुछ लोग मजबूरी में मांगते हैं..जिन्होने भीख मांगना अपना पेशा नही बनाया है वो काम न मिलने के कारण मांगते है और काम मिलते ही भीख मांगना छोड़ देते हैं.. पर अधिक से अधिक लोग भीख मांगने को अपना पेशा बना लिया है ..गांव देहात में तो कम है पर भीख मांगने का ...